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Runway 34 Honest Review: अजय देवगन की फिल्म कहा मार खा गई ?

Runway 34 Honest Review: अजय देवगन फिल्म रनवे 34 की रिलीस से पहले इस पिक्चर का काफी प्रमोशन कर चुके है। जब इन एक्टरों की फिल्मे रिलीस होती है, तब मानो यह सब कलाकार चारो ओर छाये रहते है। फिल्म की प्रमोशन के साथ-साथ किसी टॉपिक पे किसी के साथ उलझ जाना और फिर उनसे ट्विटर पे लड़ाई करना। जिससे लोगो का ध्यान उन पर पड़े और आगे जाके उनकी आनेवाली फिल्म को फायदा पहुंचे। यह चीज़ आज कल आम बात हो गई है। खेर, अजय देवगन और अमिताभ बच्चन की फिल्म रनवे 34 आज रिलीज हो गई है। कई फ़िल्म क्रिटिक्स ने इस फ़िल्म को 4 से लेकर 4.5 स्टार तक दिए हैं, लेकिन क्या वाकई यह फ़िल्म इस लायक है कि इसे एक मास्टरपीस बताया जा रहा है। तो जवाब है बिल्कुल नहीं। चलिये आपको आगे बताते है की हम ऐसा क्यों कह रहे है।

Runway 34 Honest Review अजय देवगन की फिल्म कहा मार खा गई
Runway 34 Honest Review अजय देवगन की फिल्म कहा मार खा गई

Runway 34 Honest Review: फिल्म की कहानी टॉम हैंक्स की फ़िल्म से की गई है चोरी !

इस फ़िल्म में एक्टिंग करने के साथ अजय देवगन ने इसका डायरेक्शन भी संभाला है। उनका यह बेहतर काम आपको पर्दे पर देखने को मिलता है। फ़िल्म में वीएफएक्स के ज़रिये आपको हॉलीवुड वाली फील देते रहते हैं। लेकिन फ़िल्म की कहानी 6 साल पहले रिलीज हुई टॉम हैंक्स की फ़िल्म सल्ली की कहानी से मिलती जुलती है। हालांकि रनवे 34 को असली कहानी बताया जाता है। लेकिन जब आप ये दोनों फ़िल्में देखेंगे तो चोरी आसानी से पकड़ी जाएगी। दुबई से कोच्चि इनकी फ्लाइट कैसे खराब मौसम की वजह से लेंड नहीं कर पाती? आब क्या होगा? क्या लैंडिंग हो पाएगी? होगी तो कैसे होगी? क्या सबकी जान बचेगी और लैंडिंग के बाद पायलट को कोर्ट में क्यों घसीटा जाएगा? रनवे 34 की यही पूरी कहानी है।

Runway 34 Honest Review फिल्म की कहानी टॉम हैंक्स की फ़िल्म से की गई है चोरी !
Runway 34 Honest Review फिल्म की कहानी टॉम हैंक्स की फ़िल्म से की गई है चोरी !

रनवे 34 क्या साउथ की फिल्मो का मुकाबला कर पायेगी..

हिंदी दर्शकों को कम मानकर चलना ही हिंदी सिनेमा के कारोबार के लिए बड़ी भूल बनती जा रही है। इसी मामले में साउथ महारथ हासिल करता जा रहा है। फ़िल्म में अजय देवगन की एक्टिंग अच्छी है। लेकिन अमिताभ के अभिनय में आब ताज़गी घटती जा रही है। अपनी आवाज पर जरूरत से ज्यादा ज़ोर देने से भी उनका अभिनय आकर्षण अपनी चमक खो रहा है। बोमन इरानी जैसे दमदार अभिनेता का भी सही इस्तेमाल फ़िल्में नहीं हो पाया है। हालांकि रकुल प्रीत ने अपने हिस्से का काम बखूबी किया है। फ़िल्म जब तक आसमान में रहती हैं, देखने का एक्साइटमेंट बना रहता है। लेकिन कोर्ट रूम वाले सीन बहुत बोझिल है। फ़िल्म की स्क्रिप्ट इंटरवल से पहले तक बेहतरीन है। लेकिन उसके बाद आपको ये पक्का कर रख देती हैं। हालांकि ये फ़िल्म एक अच्छी कोशीश है। लेकिन समस्या वहीं है कि आज के वक्त में ये साउथ की फिल्मों का मुकाबला कैसे करेगी।

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