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चैत्र नवरात्रि व्रत कथा सुनने मात्र से मोक्ष का मार्ग हो जाता हे सुलभ..

चैत्र नवरात्रि व्रत कथा

चैत्र नवरात्रि व्रत कथा सुनने मात्र से मोक्ष का मार्ग हो जाता हे सुलभ

शाष्त्रो के अनुसार, चैत्र नवरात्री करने का फल, अश्वमेघ यग्न के समान बताया गया है। जिसे सुनने मात्र से ही, मोक्ष का मार्ग सुलभ हो जाता है। एक बार यह कथा, ब्रह्माजी ने बृहस्पति को सुनाई थी। ब्रह्माजी ने कहा के यह चैत्र नवरात्रि व्रत कथा का फल, सम्पूर्ण कामनाओ को पूर्ण करने वाला है। इस व्रत के पालन करने पर, पुत्र की इच्छा वाले को पुत्र ,धन की इच्छा करने वाले को धन ,और रोगी को निरोगी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो आइये  जानते है, चैत्र नवरात्री से जुडी अत्यंत दुर्लभ,और फलदायी कथा का वर्णन।

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण, माँ दुर्गा का अनन्य भक्त था। उसे संपूर्ण सद्गुणों से युक्त, एक सुंदर और तेजस्वी कन्या का जन्म हुवा।

वह ब्राह्मण, नित्य दुर्गा पूजा के बाद हवन करता ,वह प्रति दिन नियम से, उसकी पुत्री वहा पर उपस्थित रहती। एक दिन, पुत्री वहा पर उपस्थित नहीं हुवी, और अपनी सहेली के साथ खेलने में व्यस्त हो गई।

तब उसके पिता को बड़ा क्रोध आया, और अपनी पुत्री को बड़े कठोर वचन कहे, की में तेरा विवाह किसी रोगी कोढ़ी से कर दूंगा। तब पुत्री ने सामने कहा, की आप मेरे पिता है ,आप मेरा विवाह जहा भी करे, में ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लुंगी , जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है ,आप चाहे मेरा विवाह जिससे करे, पर मेरे भाग्य में जो लिखा हे, वही मुझे मिलेगा।

तब उसके ब्राह्मण पिता ने क्रोध वश उसका विवाह, एक कष्टी कोढ़ी से कर दिया। उसके पुरे शरीर में कोढ़ निकला हुवा था। विवाह होते ही एक बार पुत्री ने सोचा के यह क्या हो गया। पर वह समज गई के जो भी हुवा, मेरे भाग्य के अनुसार ही हुवा होगा।

तब वह निराश होकर उसके पति के साथ, जंगल में भटक भटक के जीवन बिताने लगी।जंगल में बड़े डरावने जानवर, और राक्षशो से डरते बचते हुवे रहने लगी। 

तब एक बार देवी भगवती ने इसकी इस दशा को देख, उसके पूर्व जन्म के पुण्य के प्रभाव से उसको पुकारा। हे पुत्री। में तुमसे प्रसन्न हु ,मुझसे जो चाहे वरदान मांगलो। तब वह ब्राह्मणी ने कहा ,आप कौन हो ,तब देवी ने कहा, में आदि शक्ति देवी दुर्गा हु ,तुम्हारे पूर्व जन्म के पुण्यो से, में तुम्हे कुछ देना चाहती हु।

तुम पूर्व जन्म में एक पतिव्रता स्त्री थी। एक बार तुम्हारे पति ने चोरी की थी। उस चोरी की वजह से, तुम दोनों को कारागृह में कैद कर दिया था। उस समय, तुम्हे नौ दिनों तक भोजन नहीं दिया गया था।

वह समय चैत्र नवरात्रि का समय था। तब तुमने न कुछ खाया, न तो तुमने जल ग्रहण किया। तुम्हारे इसी नौ दिनो के व्रत प्रभाव के कारन, में तुम्हे मनोवांछित फल देना चाहती हु। तुम्हे जो चाहिए वो मांगलो।

चैत्र नवरात्रि व्रत कथा
चैत्र नवरात्रि व्रत कथा

तब ब्राह्मणी ने कहा, अगर आप मुज पर प्रसन्न है, तो हे माता। आप मेरे पति का कोढ़ दुर करदो। तब माँ दुर्गा ने एक दिन के व्रत के समान, उसके पति का कोढ़ दूर कर दिया। और उसका पति अति तेजस्वी और स्वस्थ हो गया।

तब ब्राह्मणी ने अपने पति का मनोहर रूप देखकर ,माँ की स्तुति की, के हे माँ दुर्गा। हे कष्ट कापिणी ,हे दुखो को दूर करने वाली ,रोगी को निरोगी करने वाली ,देवी जगदम्बे ,हे शक्ति स्वरूपिणी, आप मेरी रक्षा करे। माँ ने  इस स्तुति को सुन, उसे अपने गर्भ से एक बुद्धिमान ,धनवान और जितेन्द्रिय पुत्र के जन्म का आशीर्वाद दिया।

तब माँ ने वापस कहा ,और मांगो पुत्री। तब ब्राह्मणी ने कहा। अगर माँ आप मुझपर प्रसन्न है, तो मुझे चैत्र नवरात्री व्रत पर मिलने वाले फल का विस्तार से वर्णन करे। तब दुर्गा माँ ने कहा। हे ब्राह्मणी। में तुम्हे समस्त पापो, और दोषो का नाश करने वाली, नवरात्री व्रत की विधि बतलाती हु। जिसे सुनने मात्र से ही मोक्ष का मार्ग सुलभ हो जाता है।

इस प्रकार दुर्गा माँ, स्वयं, चैत्र नवरात्री पर होने वाली पूजा विधि का वर्णन, उस ब्राह्मणी को करती है।

आशा करते है आपको माँ दुर्गा की यह चैत्र नवरात्रि व्रत कथा अच्छी लगी होगी ,

बोलो जय माँ दुर्गा। 


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