राम ने हनुमान को मृत्युदंड क्यों दिया? Ram Hanuman Yudh

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राम ने हनुमान को मृत्युदंड क्यों दिया?
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राम ने हनुमान को मृत्युदंड क्यों दिया?

राम ने हनुमान को मृत्युदंड क्यों दिया?

एक बार सभी ऋषि मुनि और नारदजी आपस में चर्चा कर रहे थे, की राम का नाम स्वयं श्रीराम से भी बड़ा है। पर सब इस असमंजस में थे, की इसको साबित कैसे करे, तभी हनुमानजी वहा पर खड़े-खड़े देख रहे थे, और सभी की बातो को सुन रहे थे, पर वह चुप रहे।

सभी विदा ले रहे थे, तब हनुमानजी सभी ऋषिओ को बारी-बारी से प्रणाम कर रहे थे।
पर ऋषि विश्वामित्र को हनुमानजी ने अनदेखा कर दिया।

विश्वामित्र को अति क्रोध आया,अपना अपमान हुआ देख, विश्वामित्र का क्रोध चरम सिमा पर था। उन्होंने श्री राम से अनुरोध किया के हनुमानजी को मृत्यु दंड दिया जाये।

प्रभु श्री राम को हनुमानजी अति प्रिय थे ,वह असमंजस में पड़ गए ,पर गुरु की अवगणना भी तो नहीं की जा सकती थी। फिर श्री राम ने गुरु विश्वामित्र का मान रखते हुवे, हनुमानजी को स्वयं मृत्यु दंड देने पहुंचे।

जब हनुमानजी को पता चला की प्रभु श्री राम स्वयं उनको मृत्यु दंड देने आ रहे है। तो हनुमानजी ध्यान में बैठ गए,और प्रभु का नाम लेने लगे, राम-राम के नाम का जप करने लगे।

फिर वहा श्री राम आये और हनुमानजी पर बाण चलाया, पर हनुमानजी पर कोई बाण नहीं छू पा रहा था। प्रभु श्रीराम ने बहुत सारे अश्त्र शस्त्र का प्रयोग किया पर सभी शश्त्र विफल हो रहे थे।

आखिर श्री राम ने ब्रह्माश्त्र का प्रयोग किया। पर वह भी हनुमानजी का बाल भी बांका नहीं कर पाया। क्यूंकि वह राम नाम का जब कर रहे थे, तब प्रभु ने कहा यह मेरे नाम का जप कर रहा है।

इसको में तो क्या ,तीनो लोको में कोई इसे छू नहीं सकता। पर प्रभु राम फिर भी गुरु की आज्ञा का मान रखते हुवे ,बाणो को छोड़ना चालू रखा। श्री राम ने सारे भयंकर अस्त्रों का उपयोग शुरू किया।

भगवान के बाणो से प्रलय जैसी स्थिति आने लगी थी। तभी नारदजी, विश्वामित्र और सारे ऋषिगण वहा आ पहुंचे, और श्री राम को रोक लिया और विश्वामित्र ने राम को उनके वचन से मुक्त कर दिया। फिर नारदजी ने सारि बात बताई की कैसे प्रभु श्री राम का नाम स्वयं श्री राम से भी ज्यादा शक्तिशाली है।

इस प्रकार फिर प्रभु श्री राम ने हनुमानजी की भक्ति देख उनको अपने गले लगा लिया।
बोलो जय श्री राम।


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