मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा – Mallikarjun Jyotirling in Hindi

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग सूतजी ने कहा – हे ऋषियों! अब ध्यान से सुनिए क्योंकि मैं आपको मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा की संपूर्ण महिमा का वर्णन करता हूं।

जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करके कैलाश लौटे, उन्हें पता चला कि गणेश का विवाह हो गया था। यह जानकर उन्हें दुःख हुआ और वह नाराज होकर कॉच नाम के पर्वत ऊपर चले गए।

यह जानकर शिव-पार्वती को बहुत दुख हुआ। वे कार्तिकेय को मनाने के लिए कौंच पर्वत पर गए और पुत्र को मनाने लगे। लेकिन कार्तिकेय नहीं माने, तो शिव और पार्वती पुत्र प्रेम में ज्योतिर्मय के रूप में वहां बस गए।

पर्व के दिन वे अपने पुत्र को देखने वहां आते-जाते रहते थे। अमास के दिन शिवजी वहाँ जाते थे, और पूर्णिमा के दिन पार्वती पुत्र के पास जाते थे।

उसी दिन से त्रिलोक में शिव का मल्लिकार्जुन नाम का शिवलिंग प्रसिद्ध हो गया। इस शिवलिंग में जो भी व्यक्ति दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। इस प्रकार मल्लिकार्जुन के नाम से भगवान शिव वहां बस गए।


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