जानिए पद्म पुराण क्या है ? Padma Purana in Hindi

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पद्म पुराण
पद्म पुराण

जानिए पद्म पुराण क्या है ? Padma Purana in Hindi

पद्म पुराण अनेक प्रसिद्द धार्मिक पुराणों मेसे एक है। यह पुराण सबसे बड़े पुराण स्कन्द पुराण से छोटा है पर बाकि सारे पुराणों मेसे सबसे बड़ा और विशाल पुराण है। इसमें ५५ हज़ार श्लोक मिलते है।

इसमें उपाख्यान और कथनो को ज़्यादा महत्व दिया गया है। इसमें पुराने राजा महाराजा और महान पुरुषो के बारेमे बताया गया है। अन्य पुराणों द्वारा जिस कथाओ का वर्णन मिलता है यहाँ वही कथाओ का वर्णन दूसरी तरह किया गया है।

पद्म पुराण मतलब वैष्णव पुराण ,यह मुख्यरूप से वैष्णव पुराण ही है। इस पुराण में विष्णु पुराण के साथ साथ भगवन शिव का भी वर्णन मिलता है। इस पुराण में भगवन विष्णु को ब्रह्मा और महेश से सर्वोच्च बताया गया है।

पद्म पुराण में विष्णु की उपासना को सात्विक ,ब्रह्मा की उपासना करने वाले पुराणों को ‘राजस’ और शिव की उपासना करने वाले पुराणों को ‘तमस’ की श्रेणी में रखा गया है।

पद्म पुराण पांच खंड में विभाजित है। Padma Purana in Hindi

१. श्रुष्टि खंड

२. भूमि खंड

३. स्वर्ग खंड

४. पाताल खंड

५. उत्तर खंड

अतिरिक्त सागर खंड और ब्रह्म खंड का उल्लेख भी मिलता है।

1. श्रुष्टि खंड :

इसमें बयासी अध्याय मिलते है। इसमें मानवो की सांत तरह की श्रुष्टि रचना का उल्लेख मिलता है। इसमें तीर्थो का वर्णन और कार्तिकेय ,नरकासुर आदि कथाओ का वर्णन भी मिलता है।

इसमें श्राद्धकर्म ,सात सागर ,द्रीप तथा पर्वतो का वर्णन भी विस्तार से बताया गया है। इसमें चतुर्थी तिथि तथा शुक्लपक्ष के मंगलवार का श्राद्धकर्म का विशेष महत्व बताया गया है ,कहते है यह दिन को जो श्राद्ध कर्म करता हे उसे प्रेतयोनि नहीं भोगनी पड़ती।

भगवन श्री राम के पिता का श्राद्धकर्म भी पुष्कर में उन्होंने किया था, इसका उल्लेख भी मिलता है। तारकासुर के वध की कथा भी मिलती है।

इसमें तुलसी और आंवले का अति वखान किया गया है। तुलसी के पौधे की महिमा आते गई है की जिसके घर में तुलसी का पौधा होता है वहा प्रेत,भूत ,बाधा ,रोग आदि प्रवेश नहीं करते।

2. भूमि खंड :

यह अनेक आख्यानों का खंड है। इसमें धर्म ,ज्ञान ,ब्रह्मचर्य ,दान का वर्णन मिलता है। जैन धर्म का उलेख भी है। भूमि खंड के आरम्भ में एक ब्राह्मण की पितृ भक्ति और वैष्णव भक्ति का बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया गया है।

यह खंड में सभी प्रचलित कथा का वर्णन मिलता है। इसमें भगवन शिव की महिमा और भगवन विष्णु को प्रसन्न करने का स्तोत्र मंत्र का भी उल्लेख दिया गया है।

3. स्वर्ग खंड:

बासठ अध्यायों का यह खंड है। स्वर्ग खंड आदि खंड से भी जाना जाता है। इसमें नर्मदा और पुष्कर जैसे तीर्थो का कल्याणकारी वर्णन मिलता है। गृह नक्षत्र ,शकुंतला दुष्यंत तथा हरिश्चंद्र आदि का वर्णन बहुत सुन्दर रूप से किया गया है।

इसमें भारत वर्ष की सभी नदियों ,पर्वतो और राजाओ का वर्णन मिलता है। एकादशी व्रत का अति महत्व बताया गया है। वर्णन हे की सभी व्रतों में एकादशी व्रत का इतना महत्व बताते है की इस व्रत से भगवन विष्णु तुरंत प्रसन्न होते है। 

4. पातळ खंड :

इस खंड में रावण वध करने के पश्चात् भगवन श्री राम की कथा का वर्णन मिलता है।

इस के आलावा भगवन श्री कृष्ण ,नारदजी ,रावण तथा रक्षा के बारे में भी वर्णन मिलता है। कृष्णा अवतार ,राम अवतार की अलग अलग कथा का वर्णन किया गया है।  

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5. उत्तर खंड:

पद्म पुराण बारहवीं शताब्दी के बाद का माना जाता है। उत्तर खंड में सती पत्नी तुलसी वृंदा  ,जलंदर राक्षश कथा का वर्णन है। इसमें हरिद्वार ,गंगावतरण ,काशी ,प्रयाग तथा गया तीर्थ का वर्णन मिलता है।

इसमें बलि ,वामन ,तुलाधार की कथा का वर्णन मिलता है। इन कथनो और आख्यानों में से यह सिखने को मिलता है की धर्म का पालन करते हुवे सरल जीवन जीना कई कर्मकांडो और अनुष्ठानो से ज्यादा लाभ दायक और कल्याणकारी है।

पद्म पुराण में इससे जुडी एक प्रचलित मार्केंडय ऋषि की कथा भी मिलती है।

एक बार मुकण्डु नामक एक गुणी व्यक्ति थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति हेतु उसने और उसकी पत्नी ने घोर तपस्या की। तपस्या सफल होने पर उनको पुत्र की प्राप्ति हुवी ,उनका पुत्र सर्वगुण संपन्न और अति तेजस्वी था।

एक बार एक तपस्वी उनके यहाँ पधारे तब बालक ने आशीर्वाद लिया ,आशीर्वाद देते समय ऋषि कुछ चिंतित दिखाई दिए। तब मुकण्डु ने उनसे पूछा क्या हुवा कुछ बताइये ,तब ऋषि ने कहा तुम्हारा पुत्र इतनी काम उम्र में अत्यंत तेजस्वी और बड़ा ज्ञानी है।

परन्तु यह अल्प आयु का है। यह १६ साल तक ही इसकी उम्र है,और फिर तपस्वी वहा से चले गए। फिर मुकण्डु ने मार्केंडय को अधिक से अधिक शिक्षा और धर्म का ज्ञान दिया ,फिर मुकण्डु ने कहा तुम जिन तपस्वी और ज्ञानी को देखो उनके पैर छूके आशीर्वाद ज़रूर लोगे।

मार्केण्डय ने ऐसा ही किया जो भी ऋषि या तपस्वी वह से गुज़रता वह उनका आशीर्वाद ज़रूर लेता। जब उसकी आयु केवल ५ दिन ही शेष रह गई तब वह से सप्तऋषि वह से जा रहे थे।

मार्केण्डय ने उनका आशीर्वाद लिया ,तब सप्तऋषि के मुख से आयुष्मान भव: का आशीर्वाद निकला ,फिर सप्तऋषि ने देखा की इसकी आयु तो केवल ५ दिन ही शेष है।

अब ऐसा क्या करे की मेरा आशीर्वाद जूठा ना हो ,तब सप्तऋषि बालक मार्केण्डय को ब्रह्मा जी के पास ले गए। ब्रह्माजी ने उस बालक को देख आयुष्मान भव: का आशीर्वाद निकला तब सप्तऋषिने कहा बालक की आयु केवल ५ दिन ही शेष है। अब ऐसा उपाय कीजिए के मेरा और आपका आशीर्वाद विफल न हो।

तब ब्रह्माजी ने कहा के यह बालक मार्केण्डय को मेरी आयु के बराबर आयु मिलेगी। इस तरह ब्रह्माजी से वरदान पाकर वह ब्रह्माजी के समान आयु पाकर चिरंजीवी हो गए। यह आगे चलकर विख्यात परम ज्ञानी ऋषि मार्केण्डय बने। उन्हो ने अनेक चतुर्युग देखे और जीवित रहे।

इसीलिए पद्म पुराण में बताये गए ज्ञान ,गुण ,शिष्टाचार ,सदाचार को यग्नो और अनुस्थानो को कई गुना लाभदायक और कल्याणकारी बताया गया है। 


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