गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है,जाने तिथि, महत्व और उत्सव

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गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है
गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है

गणेश चतुर्थी उत्सव का समापन या समाप्ति दिन तब होता है जब गणेश विसर्जन होता है। इस दिन को अनंत चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है।गणपति विसर्जन का पवित्र दिन बहुत खुशी और भव्यता के साथ मनाया जाता है, क्योंकि भक्त अगले साल लौटने के वादे के साथ अपने पसंदीदा भगवान गणेश को उनके स्थान पर वापस जाने के लिए विदाई देते हैं।

2021 में गणेश विसर्जन कब है?

इस साल गणेश विसर्जन 19, सितंबर, 2021, रविवार को अनंत चतुर्दशी के दिन किया जायेगा।

गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है?

धर्म ग्रंथ अनुसार वेदव्यासजी ने गणेश चतुर्थी से ही भगवान् गणेश को महाभारत महाकाव्य की कथा लगातार दस दिनों तक सुनाई थी। जिसे गणेशजी ने अक्षरश: लिखा था। दस दिनों बाद वेद व्यास ने जब अपनी आँखे खोली तो उन्होंने देखा की दस दिनों की महेनत से भगवान् गणेश का शरीर का तापमान काफी बढ़ गया है। वेद व्यासजी नज़दीक के सरोवर में लेजाकर उनको शीतल जल से उनको ठंडा करते है।

उसके बाद वेदव्यासजी ने गणपतिजी का तापमान ना बढे इसलिए उन्होंने गणेशजी को मिटटी का लेप भी लगाया था। जब यह लेप सुख गया तब गणेशजी का शरीर जकड गया था। और फिर मिटटी भी झरने लगी थी। तभी व्यासजी ने उनको शीतल सरोवर के जल में उतारकर उनको शीतल किया था। तभी से गणेश स्थापन और विसर्जन किया जाता रहा है।

गणेश चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?

गणेश चतुर्थी दस दिवसीय त्योहार है जो भाद्रपद महीने के चौथे दिन शुरू होता है। यह हर साल त्योहार अगस्त या सितंबर के महीने में आता है। उत्सव को विस्तृत पंडालों, घरों या विभिन्न अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना के साथ चिह्नित किया जाता है।

विनायक चतुर्थी का उत्सव बड़े पैमाने पर विसर्जन या समुद्र या जल निकाय में भगवान गणपति की मूर्ति के विसर्जन के साथ समाप्त होता है। बड़ी संख्या में भक्त सड़कों पर बहुत भव्यता और धूमधाम से जुलूस निकालते हैं। यह त्यौहार महाराष्ट्र राज्य में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

भगवान गणेश की मूर्ति बहुत खुशी, धूमधाम और भव्यता के साथ निकाली जाती है। भगवान गणेश की मूर्तियों को उनके पूजा स्थल से विसर्जन स्थल पर ले जाया जाता है।

पर्यावरणीय चिंताओं के कारण, आजकल गणेश की मूर्तियों को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित किया जा रहा है। इस तरह के विसर्जन को पर्यावरण के अनुकूल गणेश चतुर्थी उत्सव मनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

गणेश विसर्जन के लिए अलग-अलग तिथियां कब हैं?

इन दिनों में गणेश विसर्जन किया जा सकता है, गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन का अनुष्ठान गणेश चतुर्थी के उसी दिन गणेश पूजा पूरी करने के बाद किया जा सकता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अधिकांश उत्थापन या हिंदू देवताओं का विसर्जन पूजा के अंत में होता है।

डेढ़ दिन
जब गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू होने के अगले दिन गणेश विसर्जन किया जाता है तो इसे डेढ़ दिन का गणेश विसर्जन कहा जाता है। इस समय अवधि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त गणेश विसर्जन का अनुष्ठान करते हैं। इस दिन विसर्जन करने वाले भक्त आमतौर पर दोपहर में पूजा करते हैं और मध्यना के बाद वे गणेश की मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाते हैं।

तीसरे, पांचवें और सातवें दिन
गणेश चतुर्थी के तीसरे, चौथे, और सांतवे दिन भी गणेश विसर्जन किया जा सकता है।

11वें दिन
अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन की रस्म करने के लिए सबसे पुण्य और शुभ दिन माना जाता है। अधिकांश स्थानों पर, सैकड़ों हजारों लोग उत्सव मनाने के लिए एक साथ आते हैं।

गणेश विसर्जन का क्या महत्व है?

गणेश विसर्जन के माध्यम से, यह माना जाता है, कि भगवान गणेश अपने माता-पिता भगवान शिव और देवी पार्वती के पास वापस कैलाश पर्वत पर जाते हैं।

इस दिन, भक्त भगवान की आध्यात्मिक और दिव्य स्थिति के लिए अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। यह ‘आकार’ से ‘निराकार’ तक गणेश की यात्रा का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में, यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जो सर्वशक्तिमान के दोनों रूपों – भौतिक रूप के साथ-साथ आध्यात्मिक रूप (निराकार) को भी सम्मान देता है।

यह उत्सव जन्म, जीवन और मृत्यु के चक्र के महत्व को दर्शाता है और इस तथ्य पर भी जोर देता है कि जीवन में सब कुछ क्षणिक है। गणपति को शुभ शुरुआत के देवता के रूप में माना जाता है और माना जाता है कि विसर्जन के समय घर और परिवार की सभी बाधाओं को दूर करते हैं। यह शायद सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसका समाज के हर वर्ग को हर साल इंतज़ार रहता है।